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food - 1076 views
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Published on 07 Feb 2018 / In Traditional food Recipes

जैसा की आप सब जानते है कि उत्तराखंड देवभूमि के नाम से जाना जाता है और जब भी देवभूमि का नाम लिया जाता है तो उत्तराखंड का नाम सर्वप्रथम लिया जाता है, और जब भी देवभूमि का नाम लिया जाता है तो पहाड़ी व्यंजन या पहाड़ी खाना का नाम भी लिया जाता है, पहाड़ी व्यजन बहुत ही स्वादिष्ट होते है अब पहाड़ी व्यंजनों को देश दुनिया में प्रसिद्धि मिल रही है कई स्थानों में पहाड़ी व्यंजनों को प्रयोग किया जा रहा है, कई प्रकार के पहाड़ी व्यंजन जैसे की – दाल भात, कपुलु, फाणु, कल्दी का फाणु, झुल्दी, चैंसु भात, रैलु, बाड़ी, पल्यो, चुना (कोदा) की रोटी, मुंगरी (मक्का) की रोटी, आलू का गुटका, पापड़ (अरबी या पिंडालू) का गुटखा या साग, आलू का झोल, जंगोरा का भात, जंगोरा, अरसा (शादियों में कल्यों देने के लिए प्रसिद्ध है), बादिल, बाल मिठाई, भांग की चटनी, भट्ट की चुलकाणि, डुबुक, गहत की गथ्वाणि, गहत की भरवा रोटी, गुलगुला, झंगोरे की खीर, कुमाऊंनी रायता, लेसू, नाल बड़ी की सब्जी, आलू की थिच्वाणी, सिंगौडी, सिंसुंक साग, स्वाला, तिल की चटनी और उड़द की पकोड़ी (पूजन के लिए भी बनायीं जाती है) आदि कई है, लिम्बु की कचमोली आदि कई प्रकार के मिक्स व्यंजन भी प्रसिद्ध है, जख्या या भंगुल का तुड़का इन सभी व्यंजनों का देवता होते है, इनके प्रयोग से स्वाद बहुत ही अधिक बढ़ जाते है, सब्जियों में जैसे मरसु, राई का पालू, पालक आदि कई हरी सब्जियां होती है, इसके अलावा प्राकृतिक रूप से पायी जाने वाले कुछ व्यंजन है जैसे तैडु, गिंठी (जो की जंगल में पाया जाता है) भी खाने के प्रयोग मैं लायी जाती थी। पुराने लोग बताते है कि एक ज़माने में बसिंग का पालू भी खाया जाता था साग बना कर, और सिम्बल के पेड़ पे लगने वाले फूल का साग भी बनाया जाता था।

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